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NEET पेपर लीक मामले पर केंद्र सरकार सख्त, 21 जून को होगी दोबारा परीक्षा

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NEET UG पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बड़ा बयान दिया है। सरकार ने 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया है और जांच CBI को सौंप दी गई है।

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को लेकर सामने आए पेपर लीक मामले ने पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच बढ़ते आक्रोश और चिंता के बीच केंद्र सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने पहली बार मीडिया के सामने आकर स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस घोटाले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों को “पाताल से भी ढूंढ निकाला जाएगा।” सरकार के इस सख्त रुख के बाद परीक्षा माफिया और जांच एजेंसियों की गतिविधियां तेज हो गई हैं।

NEET परीक्षा देशभर के मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS और अन्य मेडिकल कोर्स में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है। हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं और इसे देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में गिना जाता है। ऐसे में पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद छात्रों के बीच भारी नाराजगी देखने को मिली। कई राज्यों में छात्रों ने प्रदर्शन किया और परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

इसी बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी National Testing Agency ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा अब 21 जून को आयोजित की जाएगी। एजेंसी के अनुसार छात्रों के एडमिट कार्ड, परीक्षा केंद्र और अन्य दिशा-निर्देश जल्द ही जारी किए जाएंगे। परीक्षा से जुड़ी सभी आधिकारिक सूचनाएं केवल NTA की वेबसाइट और उसके अधिकृत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जाएंगी।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि सरकार ने जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय पूरे मामले की गंभीरता से समीक्षा की। उन्होंने बताया कि पेपर लीक की प्रारंभिक जानकारी मिलने के बाद तीन से चार दिनों तक सभी तथ्यों की जांच की गई और उसके बाद परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया, ताकि किसी भी ईमानदार छात्र का भविष्य प्रभावित न हो।

उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना है। शिक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी Central Bureau of Investigation को सौंप दी गई है। CBI अब पेपर लीक नेटवर्क, परीक्षा माफिया और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है।

सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियों को शुरुआती जांच में कई अहम सुराग मिले हैं। बताया जा रहा है कि कुछ कोचिंग नेटवर्क और बिचौलियों ने “गेस पेपर” के नाम पर छात्रों तक वास्तविक प्रश्नों जैसी सामग्री पहुंचाई थी। इसी कड़ी को पेपर लीक का प्रमुख स्रोत माना जा रहा है। जांच एजेंसियां अब डिजिटल ट्रांजैक्शन, कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों को भी खंगाल रही हैं।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि देश के लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह केवल परीक्षा में गड़बड़ी का मामला नहीं, बल्कि देश के युवाओं के विश्वास से जुड़ा मुद्दा है। सरकार किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार को स्वीकार नहीं करेगी।

परीक्षा रद्द होने के बाद कई छात्रों को मानसिक तनाव और आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ा है। दूर-दराज के इलाकों से परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में छात्रों और उनके परिवारों को भारी खर्च उठाना पड़ा था। ऐसे में दोबारा परीक्षा की घोषणा के बाद छात्रों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। हालांकि कई छात्रों ने सरकार के फैसले का समर्थन भी किया है और कहा है कि निष्पक्ष परीक्षा के लिए यह जरूरी कदम था।

शिक्षा मंत्रालय ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में NEET परीक्षा को ऑनलाइन मोड में आयोजित करने पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली लागू होने से पेपर लीक जैसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी। हालांकि इस व्यवस्था को लागू करने से पहले तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारी की आवश्यकता होगी।

NTA ने छात्रों को सलाह दी है कि वे किसी भी अफवाह या फर्जी सूचना से बचें। एजेंसी ने कहा है कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली अपुष्ट खबरों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही जानकारी प्राप्त करें। हेल्पलाइन नंबर और ईमेल सुविधा भी जारी की गई है ताकि छात्रों की समस्याओं का समाधान समय पर किया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि NEET पेपर लीक मामला देश की परीक्षा प्रणाली के लिए बड़ा चेतावनी संकेत है। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक के मामले सामने आते रहे हैं, जिससे छात्रों का भरोसा प्रभावित हुआ है। ऐसे में सरकार के सामने अब केवल दोषियों को पकड़ने की ही नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था को मजबूत और सुरक्षित बनाने की चुनौती भी है।

राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा तेजी से गरमा गया है। विपक्षी दल केंद्र सरकार और NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि दोषियों पर कठोर कार्रवाई करके छात्रों को न्याय दिलाया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लगातार बहस जारी है।

देशभर के मेडिकल अभ्यर्थियों की नजर अब 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा पर टिकी हुई है। छात्र एक बार फिर तैयारी में जुट गए हैं। कोचिंग संस्थानों में भी पढ़ाई का माहौल दोबारा सक्रिय हो गया है। अभिभावकों को उम्मीद है कि इस बार परीक्षा पूरी पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ आयोजित की जाएगी।

फिलहाल CBI की जांच और सरकार की कार्रवाई पर पूरे देश की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। अब देखना होगा कि सरकार परीक्षा माफिया पर कितनी प्रभावी कार्रवाई कर पाती है और छात्रों का भरोसा दोबारा जीतने में कितनी सफल होती है।

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